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भागलपुर सीट पर राजद की नजर, अजीत शर्मा के सामने संकट

आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भागलपुर सीट पर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। यह सीट फिलहाल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजीत शर्मा के पास है, लेकिन इसबार हालात उनके लिए आसान नहीं दिख रहे हैं। दरअसल महागठबंधन के भीतर इस सीट पर राजद की मजबूत दावेदारी सामने आ रही है।

भागलपुर में राजद का मजबूत जनाधार है

राजद के रणनीतिकार लंबे समय से भागलपुर को अपने खाते में लेने की कोशिश में है। उनका मानना है कि इस सीट पर संगठन का जनाधार मजबूत है और कार्यकर्ताओं की संख्या भी अधिक है। ऐसे में गठबंधन की सीट बंटवारे की प्रक्रिया में राजद की दावेदारी को नजर अंदाज करना आसान नहीं होगा

2014 से लगातारॶजीत शर्मा विधायक हैं

अजीत शर्मा 2014 से लगातार कांग्रेस के टिकट पर इस सीट का प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं और क्षेत्र में विकास के कई कामों का दावा करते हैं। लेकिन गठबंधन की मजबूरी और राजद के दवाब के चलते इस बार उनकी उम्मीदवारी पर संकट गहराता जा रहा है। सूत्रों की माने तो यदि भागलपुर सीट पर कांग्रेस का टिकट कटता है तो अजीत शर्मा बिहपुर विधानसभा की ओर रुख कर सकते हैं। वहां भी कांग्रेस का पारंपरिक बैंक मौजूद हैं और व्यक्तिगत प्रभाव के सहारे वे अपनी सियासी जमीन बचाने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि यह फैसला आसान नहीं होगा क्योंकि बिहपुर में भी महागठबंधन के भीतर कई दावेदार सक्रिय है।

अजीत शर्मा लोकसभा का चुनाव भी लड़े है

कांग्रेस के अंदरूनी हलकों में यह चर्चाभी तेज है कि अजीत शर्मा इस बार लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं और पार्टी नेतृत्व उन्हें विधानसभा चुनाव से दूर रखकर अगले लोकसभा चुनाव की तैयारी करने का निर्देश दे सकता है। पार्टी का तर्क है कि संगठन को नए चेहरों को मौका देने और विधानसभा चुनाव में व्यापक रणनीति बनाने की जरूरत है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मनना है कि यदि कांग्रेस ने भागलपुर सीट राजद को सौंप दी तो स्थानीय स्तर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं मे असंतोष की स्थिति भी पैदा हो सकती है। वही अजीत शर्मा जैसे अनुभवी और जमीनी नेता को दरकिनार करने से महागठबंधन के समीकरण भी प्रभावित हो सकते हैं

कुल मिलाकर भागलपुर विधानसभा की तस्वीर इस बार बेहद दिलचस्प है। राजद की सक्रियता और कांग्रेस के भीतर की हलचल ने मुकाबले को और पेचीदा बना दिया है। अब देखना यह होगा कि महागठबंधन के अंतिम फैसले में किसके नाम पर मोहर लगती है। राजद के नये पर या फिर कांग्रेस के सीनियर नेता अजीत शर्मा पर।

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