राष्ट्रीय

जंजीर में कैद होकर जल चढ़ाने निकले भक्त

सावन मास में जल चढ़ाने प्रति दिन लाखों कांवड़िया सुल्तानगंज से जल भरकर 105 किलोमीटर पैदल चलकर देवघर बाबा भोलेनाथ की नगरिया जाते हैं और जल चढ़ाते हैं

एक ही नारा बोल-बम

सुल्तानगंज से देवघर वैसे तो सालों भर भक्त पैदल या अपने किसी साधन से जल चढ़ाने जाते हैं जिसके कारण 105 किलोमीटर का ये लंबा सफर बोल-बम के नारों से गुंजायमान रहता है।

लेकिन सावन माह की बात ही निराली होती है जब देश के कोने कोने से कांवड़िया जल भरकर बोल-बम का नारा लगाते हुए जाते हैं तो ये लंबा सफर भी आसान हो जाता है।

मंजिल एक रूप अनेक

सुल्तानगंज से जब कांवड़िया चलते हैं तो सबकि मंजिल एक ही होती है देवघर। लेकिन भक्तों के रूप अनेक होते हैं । अभी एक कांवड़िया जो जहानाबाद के शंभू कुमार है वो बीस वर्षों से देवघर जल चढ़ाने जाते हैं लेकिन इस बार उनका रूप अलग था और सबको आश्चर्यचकित कर रहा था।

भोलेनाथ इसबार सपने में आये थे

जहानाबाद के शंभू कुमार इस बार देवघर जल चढ़ाने कैदी के रूप में अपने शरीर को जंजीरों में जकड़कर जा रहे हैं। जब उनसे पूछा गया कि इसका कारण क्या है तो उन्होंने बताया कि वो 20 वर्षों से देवघर जल चढ़ाने पैदल जाते हैं लेकिन इस बार स्वयं भोलेनाथ ने सपने में आकर कहा कि तुमने गुनाह किया है इसलिए तुमको गुनहगार के रूप में आना होगा।और जब बाबा भोलेनाथ का आदेश हुआ तो वो जंजीर में कैदी बनकर देवघर बाबा भोलेनाथ का दर्शन करने जा रहे हैं।

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