बिहपुर प्रखंड अंतर्गत सोनवर्षा स्थित प्रसिद्ध बड़ी भगवती स्थान में नागपंचमी के अवसर पर आयोजित होने वाले वार्षिक पूजन व मेले को लेकर तैयारियाँ जोरों पर हैं।जनमान्यता है कि इस शक्ति पीठ की चौखट से सर्पदंश के शिकार अनेक लोगों को जीवनदान मिला है। यहाँ स्थित देवी मंदिर के नीर को चमत्कारी माना जाता है, जिसकी मान्यता दूर-दराज़ के जिलों तक फैली हुई है।
सर्पदंश से मुक्ति का है प्रमुख स्थल
बिहपुर प्रखंड के सोनवर्षा गांव में स्थित बड़ी भगवती स्थान में नागपंचमी के दिन भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ता है ।जनमान्यता है कि इस मंदिर की चौखट से सर्पदंश के शिकार अनेक लोगों को जीवनदान मिला है जिसकी मान्यता दत्त दुर जिलों तक फैली हुई है । यहां स्थित देवी मंदिर के नीर को चमत्कारि माना जाता है।
आठ दस जिलों के लोग यहां आते हैं मन्नतें मांगने
हर वर्ष की तरह इस बार भी बाँका, खगड़िया, बेगूसराय, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार सहित कई जिलों से श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। श्रद्धा और विश्वास का केंद्र बना यह स्थल नागपंचमी पर हजारों भक्तों की उपस्थिति से गूंज उठता है। इसी क्रम में शुक्रवार को मंदिर परिसर में ग्रामीणों व कमेटी सदस्यों की एक अहम बैठक आयोजित हुई ।बैठक में पूजा और मेले के सुचारू संचालन को लेकर व्यापक चर्चा की गई और व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए कई अहम प्रस्ताव पारित किए गए।
पूजन व मेले की तैयारी और समन्वय के लिए मंदिर कमेटी पूरी तरह सक्रिय है। कमेटी के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष , सचिव, उप सचिव, कोषाध्यक्ष , सह-सचिव के साथ सदस्य सहित कई सक्रिय कार्यकर्ता तैयारी में जुटे हैं। पूरे आयोजन को सफल बनाने में वर्तमान व पूर्व पंचायत प्रतिनिधियों के साथ-साथ स्थानीय पुलिस प्रशासन की भूमिका भी अहम रहती है। सुरक्षा, साफ-सफाई, पार्किंग, पेयजल और स्वास्थ्य सुविधा जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई है।
पांच सौसे ज्यादा लोग फुलाइस करते हैं
बड़ी भगवती स्थान न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यहाँ की नागपंचमी पर होने वाली गतिविधियाँ सामाजिक एकता, जनभागीदारी और सांस्कृतिक उत्सव का भी प्रतीक बन गई हैं। यहां पर पांच सौ से ज्यादा भक्त फुलाइस के लिए प्रत्येक वर्ष आते हैं ।
चार से ज्यादा पाठा की बलि दी जाती है
मां भगवती के मंदिर में प्रत्येक साल मान्यता पुरी होने पर चार सौ से श्रद्धालु मान्यता पूरी होने पर पाठा की बलि देते हैं एवं अपने बच्चों का मुंडन भी करवाने माता के दरबार में करते हैं श्रद्धालु बड़ी संख्या में भाग लेकर इस आयोजन को हर वर्ष भव्य और ऐतिहासिक बनाते हैं।